July 23, 2019

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने तरीके से आंकलन कर रहे हैं।  मगर  इन नतीजों की वजह से राहुल गांधी का कद बढ़ा है इसमें किसी को संकोच नहीं होना चाहिए, यहीं वजह है कि कथित तौर पर प्रस्तावित महागठबंधन में राहुल गांधी को अगली कतार में लाकर खड़ा कर  दिया है। पांचों राज्यों में सबसे ज्यादा हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों जहां पर पहले से बीजेपी की सत्ता थी, उसकी चर्चा हो रही है। इन तीनों राज्यों के नतीजों की वजह से एक तरफ जहां कांग्रेस में खुशी की लहर है, तो भारतीय जनता पार्टी में जबरदस्त निराशा है। निराशा का आलम कुछ ऐसा है कि रैलियों और टीवी डिबेट्स में दहाड़ने वाले बीजेपी के बड़े नेताओं से लेकर छोटे नेताओं की जुबान खुल नहीं रही हैं और ना ही अब तक अमित शाह मीडिया के सामने आकर अपनी हार स्वीकार की है।

कांग्रेस ने बीजेपी को बेदम कर दिया

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के साथ कई मायनों में कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी लेकर आई है। राहुल गांधी को अब पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर दोनों जगहों पर संतुलन बनाकर चलना होगा। पार्टी के कई बड़े नेताओं की गुटबाजी को खत्म करना होगा और कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाना होगा कि मोदी के जिस आंधी की बात कही जा रही थी, वो दरअसल कुछ नहीं है और कांग्रेस पार्टी में दम है कि वो हरा सकती है। दूसरी तरफ मोदी सहित बीजेपी का कोई भी नेता अब राहुल गांधी को पप्पू कहने से डरेगा, क्योंकि राहुल गांधी मोदी के लिए अब पप्पू नहीं रहे बल्कि चुनौती बन चुके हैं। इसके अलवा बीजेपी और मोदी सरकार को अपने बर्ताव में भी अंतर लाना होगा। अब कांग्रेस को कोसने की बजाय अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने परोसने में ही भलाई है नहीं तो जनता के बीच ये संदेश गया है कि मोदी सिर्फ कहते हैं करते कुछ नहीं।

तीन राज्यों से बीजेपी की विदाई

सियासी तौर पर इन पांचों राज्यों के चुनाव का असर आगामी लोकसभा चुनाव पर तो पड़ेगा ही इसलिए उससे पहले मोदी सरकार के कामकाज में अंतर भी दिखने के आसार मिल रहे हैं। मसलन मोदी सरकार अब किसानों की कर्जमाफी के बारे में सोच सकते हैं क्योंकि पिछले छह महीने में किसानों ने कई बार आंदोलन कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात, पूरी हिंदी पट्टी से लोकसभा के लिए 273 सांसद चुने जाते हैं। इन राज्यों में पार्टी की कमजोर होने का मतलब है आगामी लोकसभा चुनाव में नतीजों का पलट जाना। इसलिए इन तीन हिन्दी पट्टी राज्यों पर कांग्रेस का कब्जा हो जाना बीजेपी के लिए ना सिर्फ सिरदर्द है बल्कि इसका अगले लोकसभा चुनाव में कैसे मुकाबला किया जाए फिलहाल किसी को समझ में नहीं आ रहा है। हालांकि ये कहना जल्दबाजी होगा कि राहुल गांधी पर देश के किसानों ने विश्वास करना शुरू कर दिया है क्योंकि अभी राहुल गांधी को अपने उन सारे वादे को जमीन पर उतारना होगा जिसकी चर्चा हर रैलियों में करते थे। सबसे पहले सरकार बनने के 10 दिन के अंदर में किसानों का कर्ज माफ करके दिखाना होगा, अगर ऐसा नहीं करते हैं तो फिर कांग्रेस की मुसीबत अभी से बढ़ने लगेगी। लेकिन अगर कर्जमाफी कर दिया तो फिर लड़ाई और दिलचस्प होगी क्योंकि बीजेपी भी अपना दमखम लगाने में पीछे नहीं हटेगी।

 

Uma Shanker

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