June 20, 2019

Opinion

ग़लत पिच पर बैटिंग लेकर हाथ जला बैठी हरियाणा भाजपा

An article by Deepkamal Saharan, famous journalist of Haryana 

-भाजपा का वोटर कौन है ? क्या वो रैलियों में जाता है ? भाजपा की मजबूत स्थिति किस वर्ग में है ? क्या उनके युवा बाइक पर सैंकड़ों किलोमीटर का सफर करने में यक़ीन रखते हैं ?
-चुनाव से कम से कम सवा साल पहले लोग रैलियों में क्यों आना चाहेंगे ?
-भाजपा सरकार ने जींद और आसपास के जिलों के लिए ऐसा क्या किया है जिससे वे खुशी-खुशी भाषण सुनने आएंगे ?
-अमित शाह को कितने हरियाणवी पसंद करते हैं ?
-क्या भाजपा सरकार और हरियाणा भाजपा में सब नेता इतने एकजुट हैं कि मिलकर ज़ोर लगाएं रैली सफल करने के लिए ?

सवाल तो सारे ही महत्वपूर्ण हैं लेकिन जींद रैली के फीका रहने की सबसे असरदार वजह आखिरी सवाल में छिपी है। इस रैली का इंचार्ज कौन था, ये सवाल हरियाणा भाजपा के शीर्ष नेताओं से पर्सनली कोई पूछे तो नाम मुख्यमंत्री मनोहर लाल और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का आएगा।

क्या इन दोनों नेताओं के समर्थकों की संख्या और मिजाज़ ऐसा है कि वे किसी बड़ी रैली को कामयाब कर दें ?
अगर सेहरा इन्हीं दोनों के सिर बंधना था तो बाकी नेता क्यों अपने वर्कर्स की कसरत करवाएंगे ? अमित शाह ने भी तो रैली की ‘कामयाबी’ की ‘बधाई‘ में सिर्फ सुभाष बराला का ही नाम लिया।

मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चाओं के बीच सुभाष बराला ने जिम्मा अपने ऊपर और ज्यादा ले रखा था। बाकी यह तय है कि मंत्रियों और विधायकों को अपनी हाजिरी ही लगानी थी बस वरना संख्या दोगुनी और जोश चौगुना हो सकता था।
भला एक-दो नेताओं को मजबूत करने वाले हवन में बाकी खिलाड़ी आहूति क्यूं डालेंगे ?

डेढ़-दो लाख के दावों के बीच पूरे सभास्थल पर किसी भी समय 50 हजार से ज्यादा लोग नहीं थे। और उनमें जोश इतना ही था, जितना इनेलो या कांग्रेस के 5000 समर्थक दिखा देते।

दरअसल हरियाणा में भाजपा उन लोगों के बीच लोकप्रिय है ही नहीं जो रैलियों में जाते हैं। अगर गलतफहमी है तो दूर हो गई होगी इस रैली से। भाजपा को इस राज्य में कांग्रेस से दुखी और इनेलो से नाराज़ लोगों ने मिलकर मोदी के नाम पर सत्ता दी है। बाकी सब कागज़ी बातें हैं।

समझदारी से काम लेंगे तो हरियाणा के भाजपाई निकट भविष्य में अपनी ताकत दिखाने और खुद को आजमाने के लिए रैली तो बिल्कुल नहीं करेंगे।

यह लेख हरियाणा के विख्यात पत्रकार एंव प्रसिद्ध पुस्तक ‘दिलबदल हरियाणा’ के लेखक दीपकमल सहारन की कलम से लिखा गया है।

Deepkamal Saharan

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